मेरे सनकी अरबपति बनने से पहले

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अध्याय 34

समर की नज़र से

हमारे बीच कहे गए शब्द धुएँ की तरह लटके रह गए—ऐसे जिन्हें वापस लेना नामुमकिन था।

मैंने कह दिया था। ज़ोर से। दिन-दहाड़े, इस सँकरे-से गलियारे में खड़ी होकर—जहाँ ईंटों की दीवारों पर बेलें चढ़ रही थीं और ऊपर पत्तों के बीच से दोपहर की धूप छनकर गिर रही थी—मैंने कीरन क्रॉस से कह दिया था...

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